ओ इतिहास के लिखने वालो उनको तो यूं भूल गये
रास्ट्र स्वतंत्र कराने को थे जो फांसी पर झूल गए
गाँधी नेहरू और सुभाष को दुनिया याद ही करती है
मरे पुलिस की लाठी से जो उनको तो तुम भूल गए
रास्ट्र भवन के कंगूरे का दीप सुहाना लगता है
दीप बने जो भीत ग्रहों के उनको तो तुम भूल गए
जमुना तट पर बना मकबरा दो कब्रों का पत्थर का
उनके नीचे कितनी कब्रे उनको तो तुम भूल गए
ताजमहल है शाहजहाँ का दुनिया ऐसा कहती है
हाथ कटे जिन राजगीर के उनको तो तुम भूल गए
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