Wednesday, November 25, 2009

गजल ६

आए हो इस जहाँ में तो जाना ही पड़ेगा
दस्तूर जिंदगी का निभाना ही पड़ेगा
लाखो का कत्ल सर के बस एक ताज के लिए
मुंसिफ को यह हिसाब चुकाना ही पड़ेगा
धोखा दिया फरेब किया लूटमार की
खामियाजा इसका तुम को उठाना ही पड़ेगा
मखमल की म्स्न्दो पे करो ऐश एक दिन
बिस्तर जमी पे तुम को बिछाना ही पड़ेगा

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