क्यों कर बुझे वो सम्मा ईंधन हो जिसका पानी
लौ जिसकी रक्स में है वो आग है जवानी
हुई कोशिशें हजारों कुछ रह गई कमी पर
तब घूम फिर के जिम्मा आया है अब हमीं पर
एक ख्वाब जिसने सदिओं सबको जगाए रखा
वो जावेदा सवेरा उतरेगा कब जमीं पर
ये दिल की आग लेकर वो आग है जलानी
लौ जिसकी रक्स में है वो आग है जवानी
तूफां व आंधिओं के जो साथ बह रही है
हर जंग ए जिंदगी को जो खेल कह रही है
वह दूर आशियाना जहाँ मौत रह रही थी
किस ठाट से वहाँ पर एक शै जो रह रही है
एक बूंद ही है लेकिन दरिया की है रवानी
लौ जिसकी रक्स में है वो आग है जवानी
