उनकी निगाह ऐ नाज़ अजब काम कर गई
वह जिस तरफ़ गए मेरी दुनिया उधर गई
बचपन की याद आ गई तस्वीर देखकर
मैं ढूँढता रहा मेरी सूरत किधर गई
दंगे में इस कदर हुआ इंसानियत का क़त्ल
मन्दिर भी कांप उठा यहाँ मस्जिद भी डर गई
तुम शहरेदिल दिल को यूँ न उजाडो ऐ हाकिमो
इसको बसाने में हमें मुद्दत गुज़र गई
जो काम कोई ईसा ऐ कामिल न कर सका
अदना फ़कीर की दुआ वो काम कर गई
नाजां था जिसको देखकर शहजाद ऐ अमन
हैरत है उसके सर से वो पगड़ी उतर गई
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