जो मुल्क किसी शख्श की ख्वाहिश से बना हो
वहां जम्हूर की सरकार हो यह हो नही सकता
जिस महल की बुनियाद ही नफरत पे रखी हो
वह महल पायेदार हो यह हो नही सकता
नफरत वो दो धार की तलवार है जिसकी
ख़ुद की सिम्त न एक धार हो यह हो नही सकता
बढाते है इस उम्मीद से हम दस्त ऐ दोस्ती
हर बाजी में अपनी हार हो यह हो नही सकता
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