Sunday, November 15, 2009

अशआर

जो मुल्क किसी शख्श की ख्वाहिश से बना हो
वहां जम्हूर की सरकार हो यह हो नही सकता
जिस महल की बुनियाद ही नफरत पे रखी हो
वह महल पायेदार हो यह हो नही सकता
नफरत वो दो धार की तलवार है जिसकी
ख़ुद की सिम्त न एक धार हो यह हो नही सकता
बढाते है इस उम्मीद से हम दस्त ऐ दोस्ती
हर बाजी में अपनी हार हो यह हो नही सकता

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